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तांडव!
आज एक बार फिर मैं राष्ट्रकवि के रूप में विख्यात स्वर्गीय रामधारी सिंह दिनकर जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। दिनकर जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय रामधारी सिंह दिनकर जी की यह कविता- नाचो, हे नाचो, नटवर !चन्द्रचूड़ ! त्रिनयन ! गंगाधर !…
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उस शर्मगीं नज़र का!
उस शर्मगीं नज़र का तसव्वुर अगर ‘शमीम’,बिजली दिल-ओ-नज़र पे गिराए तो क्या करूँ| शमीम जयपुरी
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उन की वफ़ा भी!
दिल हो गया है ख़ूगर-ए-बेदाद ‘इश्क़ में,उन की वफ़ा भी रास न आए तो क्या करूँ| शमीम जयपुरी
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जलाए तो क्या करूँ!
अब ‘इश्क़ से ज़ियादा ग़म-ए-तर्क-ए-इश्क़ है,ये आग बुझ के और जलाए तो क्या करूँ| शमीम जयपुरी
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लेकिन तिरी समझ में!
हर शे’र में सुना तो गया हूँ मैं हाल-ए-दिल,लेकिन तिरी समझ में न आए तो क्या करूँ| शमीम जयपुरी
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हम छोड़ चले हैं महफिल को !
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में मुकेश जी का ये गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ जिसे उन्होंने फिल्म-‘ दिल चाह्ता है’ के लिए गाया था- हम छोड़ चले हैं महफिल को, याद आएं कभी तो मत रोना! आशा है आपको पसंद आएगा, धन्यवाद। ******
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कवि के मन की मौज!
आज प्रस्तुत है एक नवगीत, आप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा- कविता में किस किसकी शामतअब तक तुमने नहीं बुलाई,रात को बना डाला दुल्हिन झटपट से शादी रचवाई, पता नहीं चलता कब किसकोकिस हालत में तुम रख दोगे। लिखा धूप पर, सूरज पर,आवारा बादल पर लिख डाला, मौसम की मदमस्त अदाओं कोकविता के बीच संभाला, सब्र…
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माना सुकूँ-नवाज़ है!
माना सुकूँ-नवाज़ है हर शय बहार में, तेरे बग़ैर चैन न आए तो क्या करूँ| शमीम जयपुरी
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मुझ को तुम्हारी याद!
ये तो बताते जाओ अगर जा रहे हो तुम! मुझ को तुम्हारी याद सताए तो क्या करूँ| शमीम जयपुरी
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हर शय में तू ही तू!
हर शय तुझी को सामने लाए तो क्या करूँ,हर शय में तू ही तू नज़र आए तो क्या करूँ| शमीम जयपुरी