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सर झुकाओगे तो पत्थर!
सर झुकाओगे तो पत्थर देवता हो जाएगा,इतना मत चाहो उसे, वो बेवफ़ा हो जाएगा| बशीर बद्र
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ये मुरादों की हसीं रात!
आज साहिर लुधियानवी जी का लिखा एक गीत शेयर कर रहा हूँ, जो 1964 में रिलीज हुई फिल्म- ग़ज़ल से है, जिसके नायक सुनील दत्त जी थे| हम जानते हैं कि विवाह के अवसर पर सेहरा गाया जाता है, खुशी का मौका होने के कारण और भी बहुत से गीत गाए जाते हैं, लेकिन हमारी…
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दृश्य ही अदृश्य हो जाएगा!
स्वर्गीय भारत यायावर जी की एक कविता आज शेयर कर रहा हूँ| मैं उनसे कभी मिला नहीं, फ़ेसबुक पर मेरे मित्र थे, अपनी रचनाओं के बारे में सूचना देते रहते थे, जिनको पढ़कर मैं काफी प्रभावित होता था, विशेष रूप से फणीश्वर नाथ ‘रेणु’ जी पर उन्होंने अत्यंत सराहनीय कार्य किया है| विभिन्न विषयों पर,…
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शायर तेरा, ‘इन्शा’ तेरा!
बेदर्द, सुननी हो तो चल, कहता है क्या अच्छी ग़ज़ल,आशिक़ तेरा, रुसवा तेरा, शायर तेरा, ‘इन्शा’ तेरा। इब्ने इंशा
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कहता नहीं ख़ामोश है!
बेशक, उसी का दोष है, कहता नहीं ख़ामोश है,तू आप कर ऐसी दवा बीमार हो अच्छा तेरा। इब्ने इंशा