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तुम्हारे नाम पे आयेंगे!
बड़ा है दर्द का रिश्ता ये दिल गरीब सही,तुम्हारे नाम पे आयेंगे ग़म-गुसार चले| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
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जो कू-ए-यार से निकले तो–
मकाम ‘फ़ैज़’ कोई राह में जँचा ही नहीं,जो कू-ए-यार से निकले तो सू-ए-दार चले| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
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जो हम पे गुज़री सो गुज़री!
जो हम पे गुज़री सो गुज़री मगर शब-ए-हिज्राँ,हमारे अश्क तेरी आकबत सँवार चले| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
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आज ज़िक्र-ए-यार चले!
क़फ़स उदास है यारो सबा से कुछ तो कहो,कहीं तो बहर-ए-ख़ुदा आज ज़िक्र-ए-यार चले| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
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गुलशन का कारोबार चले!
गुलों में रंग भरे बाद-ए-नौ-बहार चले,चले भी आओ के गुलशन का कारोबार चले| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
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आदतें डालने पर!
काफी लंबा समय हो गया ये ब्लॉग लिखते हुए| मैंने कभी यह नहीं सोचा कि विद्वान लोग ही इसको पढ़ें और अपनी सम्मति दें| जो भी मेरा पाठक है, वह मेरी दृष्टि में सबसे विद्वान है|शुरुआत मैंने की थी अपने जीवन के प्रसंगों, प्रारंभिक जीवन जो दिल्ली-शाहदरा में रहते हुए बिताया, उसके बाद विभिन्न स्थानों…
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हवा, ख़ुश्बू, ज़मीनो-आसमाँ!
सब उसी के हैं हवा, ख़ुश्बू, ज़मीनो-आसमाँ,मैं जहाँ भी जाऊँगा, उसको पता हो जाएगा| बशीर बद्र
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दवा हो जाएगा!
मैं ख़ुदा का नाम लेकर पी रहा हूँ दोस्तो,ज़हर भी इसमें अगर होगा, दवा हो जाएगा| बशीर बद्र
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कोई दूसरा हो जाएगा!
कितनी सच्चाई से मुझसे ज़िन्दगी ने कह दिया,तू नहीं मेरा, तो कोई दूसरा हो जाएगा| बशीर बद्र
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हम भी दरिया हैं!
हम भी दरिया हैं, हमें अपना हुनर मालूम है,जिस तरफ भी चल पड़ेंगे, रास्ता हो जाएगा| बशीर बद्र