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याद का आसरा!
स्वर्गीय कन्हैयालाल नंदन जी हिन्दी के एक श्रेष्ठ साहित्यकार थे जिनको पद्मश्री सम्मान तथा अनेक साहित्यिक पुरस्कार प्रदान किए गए थे और उन्होंने बच्चों की पत्रिका ‘पराग’ का कुशल संपादन भी किया था| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय कन्हैयालाल नंदन जी का यह गीत – तेरी याद का ले के आसरा,मैं कहाँ-कहाँ से गुज़र गया,उसे…
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उसको बेवफ़ा मैंने किया!
मुझपे अपना जुर्म साबित हो न हो लेकिन सुनो,लोग कहते हैं कि उसको बेवफ़ा मैंने किया| अहमद फ़राज़
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उस जाने-जहाँ ने लिख दिया!
हो सजावारे-सजा क्यों जब मुकद्दर में मेरे,जो भी उस जाने-जहाँ ने लिख दिया, मैंने किया| अहमद फ़राज़
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वो मेरी पहली शिकस्त!
वो मेरी पहली मोहब्बत, वो मेरी पहली शिकस्त,फिर तो पैमाने-वफ़ा सौ मर्तबा मैंने किया| अहमद फ़राज़
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मुश्किलों से तर्जुमा मैंने किया!
कैसे नामानूस लफ़्ज़ों की कहानी था वो शख्स,उसको कितनी मुश्किलों से तर्जुमा मैंने किया| अहमद फ़राज़
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बुत को खुदा मैंने किया!
संगदिल है वो तो क्यूं इसका गिला मैंने किया,जबकि खुद पत्थर को बुत, बुत को खुदा मैंने किया| अहमद फ़राज़