Category: Uncategorized
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आतिश-ए-गुलफ़ाम से जल जाते हैं!
बच निकलते हैं अगर आतिश-ए-सय्याद से हम,शोला-ए-आतिश-ए-गुलफ़ाम से जल जाते हैं| क़तील शिफ़ाई
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हम चराग़ों की तरह!
गर्मी-ए-हसरत-ए-नाकाम से जल जाते हैं,हम चराग़ों की तरह शाम से जल जाते हैं| क़तील शिफ़ाई
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दिन दिवंगत हुए!
मेरे लिए बड़े भाई और गुरुतुल्य रहे स्वर्गीय डॉक्टर कुँवर बेचैन जी की एक रचना आज शेयर कर रहा हूँ| बेचैन जी ने बहुत सुंदर गीत लिखे हैं और हम युवावस्था में उनके गीत गुनगुनाते रहते थे, जैसे- ‘जितनी दूर नयन से सपना, जितनी दूर अधर से हँसना, बिछुए जितनी दूर कुँवारे पाँव से, उतनी…
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बर्फ़ सी दिल पे गिर रही है अभी!
मैं भी किस वादी-ए-ख़याल में था,बर्फ़ सी दिल पे गिर रही है अभी| अहमद फ़राज़
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ज़ुल्फ़ों में टांकती है अभी!
फ़सले-गुल में बहार पहला गुलाब,किसकी ज़ुल्फ़ों में टांकती है अभी| अहमद फ़राज़
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दूरियों में भी दिलकशी है अभी!
क़ुरबतें* लाख खूबसूरत हों,दूरियों में भी दिलकशी है अभी | *नज़दीकियाँ अहमद फ़राज़