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घोड़े का दाना!
आज मैं हिंदी के श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय केदारनाथ अग्रवाल जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। इनकी कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय केदारनाथ अग्रवाल जी की यह कविता – सेठ करोड़ीमल के घोड़े का नौकर हैभूरा आरख। –बचई उसका जानी दुश्मन ! हाथ जोड़कर,पाँव पकड़कर,आँखों में…
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उन की अपील है!
उन की अपील है कि उन्हें हम मदद करें,चाक़ू की पसलियों से गुज़ारिश तो देखिए| दुष्यंत कुमार
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गूँगे निकल पड़े हैं!
गूँगे निकल पड़े हैं ज़बाँ की तलाश में,सरकार के ख़िलाफ़ ये साज़िश तो देखिए| दुष्यंत कुमार
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होने लगी है जिस्म में!
होने लगी है जिस्म में जुम्बिश तो देखिए,इस पर कटे परिंदे की कोशिश तो देखिए| दुष्यंत कुमार
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ये दौलत भी ले लो, ये शोहरत भी ले लो!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से मैं आज जगजीत सिंह जी का गाया एक और गीत अपने स्वर में प्रस्तुत कर रहा हूँ- ये दौलत भी ले लो, ये शोहरत भी ले लोभले छीन लो मुझसे मेरी जवानीमगर मुझको लौटा दो बचपन का सावनवो कागज़ की कश्ती, वो बारिश का पानी। आशा है आपको यह…
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होठों से छू लो तुम!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में, जगजीत सिंह जी का गाया यह गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ- होठों से छू लो तुम, मेरा गीत अमर कर दो! आशा है आपको यह पसंद आएगा, धन्यवाद।
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चुनाव!
आज मैं हिंदी के एक श्रेष्ठ कवि एवं संपादक स्वर्गीय कन्हैयालाल नंदन जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। नंदन जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय कन्हैयालाल नंदन जी की यह कविता – पहाड़ी के चारों तरफजतन से बिछाई हुई सुरंगों परजब लगा दिया…
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कल नुमाइश में मिला!
कल नुमाइश में मिला वो चीथड़े पहने हुए, मैं ने पूछा नाम तो बोला कि हिंदुस्तान है| दुष्यंत कुमार
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तू न समझेगा सियासत
मस्लहत-आमेज़ होते हैं सियासत के क़दम,तू न समझेगा सियासत तू अभी नादान है| दुष्यंत कुमार