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गीत उगने दो
आज फिर से मेरी एक पुरानी रचना प्रस्तुत है, आप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा- मौन यूं कवि मत रहो,अब गीत उगने दो। अनुभव की दुनिया केअनगिनत पड़ाव,आसपास से गुज़र गए,झोली में भरे कभीपर फिर अनजाने में,सभी पत्र-पुष्प झर गए,करके निर्बंध, पिपासे मानव-मन को-अनुभव-संवेदन दाना चुगने दो। खुद से खुद की बातेंकरने से क्या होगा,सबसे, सबकी…
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क्या बतलाएं हमने कैसे!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं श्री सोम ठाकुर जी की एक ग़ज़ल के दो शेर अपने स्वर में प्रस्तुत कर रहा हूँ-क्या बतलाएं हमने कैसे सांझ-सवेरे देखे हैं! आशा है आपको ये पसंद आएंगे,धन्यवाद। *****
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बरसा जो अब के अब्र!
पिछले बरस हवेली हमारी खंडर हुई,बरसा जो अब के अब्र तो समझो खंडर गया| शीन काफ़ निज़ाम
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सूरज ही वो नहीं है!
निकली है फ़ाल अब के अजब मेरे नाम की,सूरज ही वो नहीं है जो ढलने से डर गया| शीन काफ़ निज़ाम
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यूं हसरतों के दाग!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में फिल्म-‘अदालत’ के लिए लता मंगेशकर जी का गाया गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ जिसे राजेंद्र कृष्ण जी ने लिखा था और इसका संगीत मदन मोहन जी ने दिया था – यूं हसरतों के दाग मोहब्बत में धो लिए, खुद दिल से दिल की बात…