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निराला के प्रति
स्वर्गीय शमशेर बहादुर सिंह जी को कवियों का कवि कहा जाता था, अर्थात उनकी कविताओं का अध्ययन करते हुए नए कवि काव्य लेखन सीख सकते हैं, ऐसे भी कह सकते हैं कि जिनकी कविताओं को सामान्य श्रोताओं की अपेक्षा कवियों से, काव्य मर्मज्ञों से अधिक सराहना प्राप्त होती है| श्री सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ जी हिन्दी…
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कोई सुबह को कोई जाये शाम!
रुके नहीं कोई यहाँ नामी हो कि अनाम,कोई जाये सुबह् को कोई जाये शाम| गोपाल दास नीरज
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मिलावट से बने रोज़ यहाँ सरकार!
करें मिलावट फिर न क्यों व्यापारी व्यापार,जबकि मिलावट से बने रोज़ यहाँ सरकार| गोपाल दास नीरज
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सूख गये जल स्रोत सब!
आँखों का पानी मरा हम सबका यूँ आज,सूख गये जल स्रोत सब इतनी आयी लाज| गोपाल दास नीरज
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घर आते नहीं चिट्ठी पत्री तार!
दूरभाष का देश में जब से हुआ प्रचार,तब से घर आते नहीं चिट्ठी पत्री तार| गोपाल दास नीरज
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हम पर किया यूँ छुप-छुप कर वार!
टी.वी.ने हम पर किया यूँ छुप-छुप कर वार,संस्कृति सब घायल हुई बिना तीर-तलवार| गोपाल दास नीरज
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व्यक्ति वहाँ खुद जाए!
जहाँ मरण जिसका लिखा वो बानक बन आए,मृत्यु नहीं जाये कहीं, व्यक्ति वहाँ खुद जाए| गोपाल दास नीरज
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गागर में सागर, मुँदरी में नवरत्न!
गागर में सागर भरे मुँदरी में नवरत्न,अगर न ये दोहा करे, है सब व्यर्थ प्रयत्न| गोपाल दास नीरज
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भूख न जाने शर्म!
भूखा पेट न जानता क्या है धर्म-अधर्म,बेच देय संतान तक, भूख न जाने शर्म| गोपाल दास नीरज
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पालिश करें वे भविष्य के फूल!
जिनको जाना था यहाँ पढ़ने को स्कूल,जूतों पर पालिश करें वे भविष्य के फूल| गोपाल दास नीरज