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आंगन में समाने वाला!
दूर के चांद को ढूंढ़ो न किसी आँचल में,ये उजाला नहीं आंगन में समाने वाला| निदा फ़ाज़ली
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घर छोड़ के जाने वाला!
उसको रुखसत तो किया था मुझे मालूम न था,सारा घर ले गया घर छोड़ के जाने वाला| निदा फ़ाज़ली
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आने को है आने वाला!
एक बे-चेहरा सी उम्मीद है चेहरा चेहरा,जिस तरफ़ देखिए आने को है आने वाला| निदा फ़ाज़ली
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ख़ामोशी पहचाने कौन!
मुँह की बात सुने हर कोईदिल के दर्द को जाने कौन,आवाज़ों के बाज़ारों मेंख़ामोशी पहचाने कौन। निदा फ़ाज़ली
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ऐ मेरे दिल-ए-नादान
आज मैं स्वर सम्राज्ञी, कोकिल कंठी- सुश्री लता मंगेशकर जी का गाया एक अमर गीत आपको, उसके लिखित स्वरूप के माध्यम से याद दिला रहा हूँ, आपको इस दर्द भरे गीत का स्मरण अवश्य होगा, जिसे असद भोपाली जी ने लिखा था और रवि जी के संगीत निर्देशन में लता जी द्वारा बहुत पहले गाये…
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संगीत अमर कर दो!
आकाश का सूनापन,मेरे तनहा मन में|पायल छनकाती तुम,आजाओ जीवन में|साँसें देकर अपनी,संगीत अमर कर दो|होंठों से छूलो तुम … इंदीवर
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जीत अमर कर दो!
जग ने छीना मुझसे,मुझे जो भी लगा प्यारा|सब जीता किये मुझसे,मैं हर दम ही हारा|तुम हार के दिल अपना,मेरी जीत अमर कर दो|होंठों से छूलो तुम … इंदीवर
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तो देखे केवल मन!
न उम्र की सीमा हो,न जनम का हो बंधन|जब प्यार करे कोई,तो देखे केवल मन|नई रीत चलाकर तुम,ये रीत अमर कर दो|होंठों से छूलो तुम … इंदीवर
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प्रीत अमर कर दो!
होंठों से छू लो तुम,मेरा गीत अमर कर दो|बन जाओ मीत मेरे,मेरी प्रीत अमर कर दो| इंदीवर