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अब भी बाक़ी है!
हिन्दी के एक और प्रतिष्ठित नवगीतकार श्री अनूप अशेष जी का एक नवगीत आज शेयर कर रहा हूँ| गाँव में किसानों की दयनीय दशा को दर्शाता और हौसला बढ़ाता यह गीत अत्यंत प्रभावी है| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री अनूप अशेष जी का यह नवगीत – अब तो यह मत कहोकि तुममें रीढ़ नहीं है…
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गीतों से पहले!
आज रवींद्र भ्रमर जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| रवींद्र भ्रमर जी ने कुछ बहुत सुंदर गीत लिखे हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है रवींद्र भ्रमर जी की यह कविता, जिसमें एक पक्षी के उदाहरण से जीवन में सकारात्मक सोच और उल्लसित रहने का संदेश दिया गया है– पँछी में गाने का गुन हैदो…