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हमसे भागा न करो, दूर!
हमसे भागा न करो, दूर ग़ज़ालों की तरह,हमने चाहा है तुम्हें चाहने वालों की तरह| जाँ निसार अख़्तर
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दीपक जलता रहा रात भर!
स्वर्गीय गोपाल सिंह नेपाली जी अपने समय में हिन्दी काव्य मंचों के एक प्रमुख कवि थे| मुझ जैसे पुराने काव्य-प्रेमी लोग, जो वर्तमान में सृजन और रचनाकारों से सक्रिय रूप से जुड़े नहीं हैं, विशेष रूप से गोवा में आकार बस जाने के बाद, पुराने कवियों की रचनाएं ही सबसे बड़ी धरोहर हैं| लीजिए आज…
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इक फूल देके आया था!
मैं जिसके हाथ में इक फूल देके आया था,उसी के हाथ का पत्थर मेरी तलाश में है| कृष्ण बिहारी ‘नूर’
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मैं देवता की तरह क़ैद!
मैं देवता की तरह क़ैद अपने मंदिर में,वो मेरे जिस्म के बाहर मेरी तलाश में है| कृष्ण बिहारी ‘नूर’
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मैं एक कतरा हूँ–
मैं एक कतरा हूँ मेरा अलग वजूद तो है,हुआ करे जो समंदर मेरी तलाश में है| कृष्ण बिहारी ‘नूर’
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दिया जलाये जो दर पर!
ये मेरे घर की उदासी है और कुछ भी नहीं,दिया जलाये जो दर पर मेरी तलाश में है| कृष्ण बिहारी ‘नूर’
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सितमग़र मेरी तलाश में है!
ये और बात कि पहचानता नहीं मुझे,सुना है एक सितमग़र मेरी तलाश में है| कृष्ण बिहारी ‘नूर’
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भेस बदल कर मेरी तलाश में है!
बस एक वक़्त का ख़ंजर मेरी तलाश में है,जो रोज़ भेस बदल कर मेरी तलाश में है| कृष्ण बिहारी ‘नूर’
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घर की याद !
आज एक बार फिर से मैं स्वर्गीय भवानी प्रसाद मिश्र जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| भवानी दादा अपनी ही अलग किस्म के कवि थे जो बातचीत के लहज़े में कभी-कभी बहुत दिव्य बात कह जाते थे| जैसे कवि कालिदास जी ने बादलों के माध्यम से अपने प्रेम का संदेश भेजा था, इस…
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कोई देर में जाने वाला!
इक मुसाफ़िर के सफ़र जैसी है सबकी दुनिया,कोई जल्दी में कोई देर में जाने वाला| निदा फ़ाज़ली