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दूर से पहचान लेते हैं!
बहुत पहले से उन क़दमों की आहट जान लेते हैं, तुझे ऐ ज़िंदगी हम दूर से पहचान लेते हैं| फ़िराक़ गोरखपुरी
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कविता कैसे लिखते हो तुम!
राजनैतिक विचार देने में अक्सर संकट शामिल होता है, लेकिन मुझे लगता है कि यह काम भी कभी-कभी करना चाहिए, भले ही वह धारा के विरुद्ध जाता हो| एक फैशन सा बन गया है कि जिन कवियों की वाणी से आपातकाल के विरुद्ध एक शब्द नहीं निकल पाया, आज वे जी भरकर सरकार को गालियां…
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अब तुम्हारा प्यार भी!
हिन्दी काव्य जगत में गीतों के राज कुँवर के नाम से विख्यात स्वर्गीय गोपाल दास ‘नीरज’ जी का एक और गीत आज शेयर कर रहा हूँ, जिन्होंने न केवल कवि सम्मेलनों में श्रोताओं को अपने गीतों पर झूमने के लिए मज़बूर किया अपितु हिन्दी फिल्मों में भी कुछ लाजवाब गीतों के माध्यम से अपना अमूल्य…
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हाथ हिलाए भी, घबराये भी!
आने वाली रुत का कितना खौफ है उसकी आंखों में,जाने वाला दूर से हाथ हिलाए भी, घबराये भी| मोहसिन नक़वी