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अजनबी के घर में रहा!
तमाम उम्र मैं इक अजनबी के घर में रहा ।सफ़र न करते हुए भी किसी सफ़र में रहा । गोपालदास “नीरज”
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दिल चुरा कर न हमको !
स्वर्गीय गोपाल सिंह ‘नेपाली’ जी की एक रूमानी कविता आज शेयर कर रहा हूँ| नेपाली जी अपने समय के सुरीले कवियों, गीतकारों में गिने जाते थे और कवि सम्मेलनों में उनका काव्य पाठ सुनने के लिए भी श्रोता लालायित रहते थे| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय गोपाल सिंह ‘नेपाली’ जी की यह कविता– दिल चुरा…
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ख़यालों तक गईं गोलाइयां हैं!
मुतास्सिर लोग यूँ हैं रोटियों से,ख़यालों तक गईं गोलाइयां हैं| सूर्यभानु गुप्त
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बिल्डिंगें बांहों की सूरत!
नगर की बिल्डिंगें बांहों की सूरत,बशर टूटी हुई अंगड़ाइयां हैं| सूर्यभानु गुप्त
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हिमगिरि विशाल, गिरिवर विशाल!
एक बार फिर से मैं आज राष्ट्रीय भावना से ओतप्रोत, राष्ट्र वंदना की रचनाएं लिखने वाले स्वर्गीय सोहनलाल द्विवेदी जी की एक राष्ट्रप्रेम से ओतप्रोत कविता शेयर कर रहा हूँ| उनकी गांधी जी के लिए लिखी गई कविता- ‘चल पड़े जिधर दो डग मग में’ बहुत प्रसिद्ध हुई और राष्ट्रीय स्वाधीनता संग्राम हेतु उन्होंने अपनी…