Category: Uncategorized
-
शुरुआत मेरी दास्तान की!
बुझ जाये सरे आम ही जैसे कोई चिराग,कुछ यूँ है शुरुआत मेरी दास्तान की| गोपालदास ‘नीरज’
-
जमीन पे छत आसमान की!
हारे हुए परिन्दे ज़रा उड़ के देख तो,आ जायेगी जमीन पे छत आसमान की| गोपालदास ‘नीरज’
-
खुशबू सी आ रही है इधर!
खुशबू सी आ रही है इधर ज़ाफ़रान की,खिडकी खुली है गालिबन उनके मकान की| गोपालदास ‘नीरज’
-
छान के फटक के मुझे!
मैं देर रात गए जब भी घर पहुँचता हूँ,वो देखती है बहुत छान के फटक के मुझे| राहत इन्दौरी
-
इशारा कर दिया उसने!
बहुत सी नज़रें हमारी तरफ हैं महफ़िल में,इशारा कर दिया उसने ज़रा सरक के मुझे| राहत इन्दौरी
-
ये एक जुगनू ने समझा दिया!
हमें खुद अपने सितारे तलाशने होंगे,ये एक जुगनू ने समझा दिया चमक के मुझे| राहत इन्दौरी
-
कमज़र्फ ने छलक के मुझे!
तआल्लुकात में कैसे दरार पड़ती है,दिखा दिया किसी कमज़र्फ ने छलक के मुझे| राहत इन्दौरी
-
परेशां करता है ये दिल!
कोई बताये के मैं इसका क्या इलाज करूँ,परेशां करता है ये दिल धड़क धड़क के मुझे| राहत इन्दौरी
-
जगा दिया तेरी पाज़ेब ने!
सुला चुकी थी ये दुनिया थपक थपक के मुझे,जगा दिया तेरी पाज़ेब ने खनक के मुझे| राहत इन्दौरी