Category: Uncategorized
-
आकुल अंतर!
आज फिर से सुरीले गीतों के सृजक और कवि कुल के गौरव सीनियर बच्चन जी, अर्थात स्वर्गीय हरिवंशराय बच्चन जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| कवि जब व्याकुलता का अनुभव करता है तो वह सभी को किसी न किसी रूप में अपनी व्याकुलता में शामिल कर लेता है| लीजिए आज प्रस्तुत है, स्वर्गीय…
-
तन्हाई नहीं जाने वाली!
आज सड़कों पे चले आओ तो दिल बहलेगा,चन्द ग़ज़लों से तन्हाई नहीं जाने वाली| दुष्यंत कुमार
-
ख़ुदाई नहीं जाने वाली!
तू परेशां है, तू परेशान न हो,इन ख़ुदाओं की ख़ुदाई नहीं जाने वाली| दुष्यंत कुमार
-
सुनाई नहीं जाने वाली!
चीख़ निकली तो है होंठों से मगर मद्धम है,बंद कमरों को सुनाई नहीं जाने वाली| दुष्यंत कुमार
-
ये खाई नहीं जाने वाली!
एक तालाब-सी भर जाती है हर बारिश में,मैं समझता हूँ ये खाई नहीं जाने वाली| दुष्यंत कुमार
-
बुझाई नहीं जाने वाली!
कितना अच्छा है कि साँसों की हवा लगती है,आग अब उनसे बुझाई नहीं जाने वाली| दुष्यंत कुमार
-
ख़तरनाक सच्चाई नहीं जाने वाली!
देख, दहलीज़ से काई नहीं जाने वाली,ये ख़तरनाक सच्चाई नहीं जाने वाली| दुष्यंत कुमार
-
कलम सरकंडे की!
श्री रामदरश मिश्र जी हिन्दी के उन श्रेष्ठ श्रेष्ठ रचनाकारों में से एक हैं, जिन्होंने कविता, कहानी और उपन्यास सभी क्षेत्रों में अपनी रचनाओं के माध्यम से उल्लेखनीय योगदान किया है| लीजिए आज प्रस्तुत है, श्री रामदरश मिश्र जी की यह कविता जो कविधर्म की ओर बड़े सधे और शालीन ढंग से स्पष्ट संकेत करती…