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लगते हैं परेशान ज़रा देख तो लो!
जीना मुश्किल है कि आसान ज़रा देख तो लो, लोग लगते हैं परेशान ज़रा देख तो लो| जावेद अख़्तर
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दिल ही दिल में ये माना तो होगा!
जीत के भी वो शर्मिंदा है हार के भी हम नाज़ाँ, कम से कम वो दिल ही दिल में ये माना तो होगा| जावेद अख़्तर
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दिल को बहलाना तो होगा!
दिल की बातें नहीं है तो दिलचस्प ही कुछ बातें हों, ज़िंदा रहना है तो दिल को बहलाना तो होगा| जावेद अख़्तर
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वो दीवाना तो होगा!
कुछ बातों के मतलब हैं और कुछ मतलब की बातें, जो ये फ़र्क़ समझ लेगा वो दीवाना तो होगा| जावेद अख़्तर
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ऐ दिल अब जाना तो होगा!
डर हमको भी लगता है रस्ते के सन्नाटे से, लेकिन एक सफ़र पर ऐ दिल अब जाना तो होगा| जावेद अख़्तर
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उसने हमको पहचाना तो होगा!
याद उसे भी एक अधूरा अफ़्साना तो होगा, कल रस्ते में उसने हमको पहचाना तो होगा| जावेद अख़्तर
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सतरंगी तितली!
आज एक बार फिर मैं अपने अत्यंत प्रिय नवगीतकार स्वर्गीय रमेश रंजक जी का एक सुंदर नवगीत शेयर कर रहा हूँ| जैसा मैंने पहले भी उल्लेख किया है रंजक जी को काव्य-पाठ करते हुए सुनने का अनुभव बहुत सुंदर होता था और मेरा सौभाग्य है कि मुझे यह अवसर अनेक बार मिला है| मैंने पहले…
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नज़र की शरारत कहाँ कहाँ!
होश-ओ-जुनूँ भी अब तो बस इक बात हैं ‘फ़िराक़,’ होती है उस नज़र की शरारत कहाँ कहाँ| फ़िराक़ गोरखपुरी
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खुले दर-ए-रहमत कहाँ कहाँ!
हर गाम पर तरीक़-ए-मोहब्बत में मौत थी, इस राह में खुले दर-ए-रहमत कहाँ कहाँ| फ़िराक़ गोरखपुरी
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तेरी चश्म-ए-इनायत कहाँ कहाँ!
अब इम्तियाज़-ए-इश्क़-ओ-हवस भी नहीं रहा, होती है तेरी चश्म-ए-इनायत कहाँ कहाँ| फ़िराक़ गोरखपुरी