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तो लगता है कि तुम हो!
आहट सी कोई आए तो लगता है कि तुम हो, साया कोई लहराए तो लगता है कि तुम हो| जाँ निसार अख़्तर
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प्यार तुम्हें दे सकता हूँ!
आज एक बार फिर मैं हिन्दी के एक श्रेष्ठ कवि और राजनीति में भी सक्रिय रहे श्री उदयप्रताप सिंह जी की एक रचना, शेयर कर रहा हूँ| जैसा शायद मैंने पहले भी उल्लेख किया है, उदयप्रताप सिंह जी, श्री मुलायम सिंह के गुरू रहे हैं| लीजिए, प्रस्तुत श्री उदयप्रताप सिंह जी की यह रचना- मैं…
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साहिल का इरादा कौन करे!
कश्ती मौजों में डाली है मरना है यहीं जीना है यहीं, अब तूफ़ानों से घबरा कर साहिल का इरादा कौन करे| आनंद नारायण मुल्ला
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उसको फ़साना कौन करे!
इक दर्द है अपने दिल में भी हम चुप हैं दुनिया ना-वाक़िफ़, औरों की तरह दोहरा दोहराकर उसको फ़साना कौन करे| आनंद नारायण मुल्ला
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फूलों का नज़ारा कौन करे!
बसने दो नशेमन को अपने फिर हम भी करेंगे सैर-ए-चमन, जब तक कि नशेमन उजड़ा है फूलों का नज़ारा कौन करे| आनंद नारायण मुल्ला
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उम्मीद दोबारा कौन करे!
दिल तेरी जफ़ा से टूट चुका अब चश्म-ए-करम आई भी तो क्या, फिर ले के इसी टूटे दिल को उम्मीद दोबारा कौन करे| आनंद नारायण मुल्ला
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तिनकों पे भरोसा कौन करे!
जब अपना दिल ख़ुद ले डूबे औरों पे सहारा कौन करे, कश्ती पे भरोसा जब न रहा तिनकों पे भरोसा कौन करे| आनंद नारायण मुल्ला
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हर बार तक़ाज़ा कौन करे!
ख़ाली है मिरा साग़र तो रहे साक़ी को इशारा कौन करे, ख़ुद्दारी-ए-साइल भी तो है कुछ हर बार तक़ाज़ा कौन करे| आनंद नारायण मुल्ला