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उस ने इस दर्जा रुलाया!
ख़ुद-ब-ख़ुद बे-साख़्ता मैं हँस पड़ा,उस ने इस दर्जा रुलाया देर तक| नवाज़ देवबंदी
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कारवां गुज़र गया-3
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं , अपने स्वर में नीरज जी के इस प्रसिद्ध गीत का दूसरा भाग प्रस्तुत कर रहा हूँ जिसे मोहम्मद रफी जी ने गाया था- कारवां गुज़र गया, गुबार देखते रहे-3 आशा है आपको यह पसंद आएगा, धन्यवाद। *********
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क्या क्या नहीं कहते!
बन जाए अगर बात तो सब कहते हैं क्या क्या,और बात बिगड़ जाए तो क्या क्या नहीं कहते| नवाज़ देवबंदी
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नदी बोली समुंदर से!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय कुंवर बेचैन जी का एक सुंदर गीत अपने स्वर में प्रस्तुत कर रहा हूँ- नदी बोली समुंदर से, मैं तेरे पास आई हूँ! आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद । ******
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कम-हिम्मती ख़तरा है!
कम-हिम्मती ख़तरा है समुंदर के सफ़र में,तूफ़ान को हम दोस्तो ख़तरा नहीं कहते| नवाज़ देवबंदी
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सृजन क्षण!
आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि श्री उद्भ्रांत जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। उद्भ्रांत जी की रचनाएं शायद मैंने पहले शेयर नहीं की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है श्री उद्भ्रांत जी का यह नवगीत – सूर्य ने पुकाराकल मेरी आकृति को सूर्य ने पुकारा उजली उजली किरणेंचेहरे से फूटींस्वर के बन्दीगृह कीदीवारें टूटीं…
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इक हम हैं कि ग़ैरों को भी!
इक हम हैं कि ग़ैरों को भी कह देते हैं अपना, इक तुम हो कि अपनों को भी अपना नहीं कहते| नवाज़ देवबंदी
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मंज़िल पे न पहुँचे उसे!
मंज़िल पे न पहुँचे उसे रस्ता नहीं कहते,दो चार क़दम चलने को चलना नहीं कहते| नवाज़ देवबंदी