बस्तियाँ दूर हुई जाती हैं!

बस्तियाँ दूर हुई जाती हैं रफ़्ता रफ़्ता,
दम-ब-दम आँखों से छुपते चले जाते हैं चराग़|

अहमद फ़राज़

Leave a comment