अपनी महरूमी के एहसास से शर्मिंदा हैं,
ख़ुद नहीं रखते तो औरों के बुझाते हैं चराग़|
अहमद फ़राज़
औरों के बुझाते हैं चराग़!
One response to “औरों के बुझाते हैं चराग़!”
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वाह वाह 🦋
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A sky full of cotton beads like clouds
वाह वाह 🦋
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