मद्धम हुआ हर साज़ का रंग!

चंग ओ नय रंग पे थे अपने लहू के दम से,
दिल ने लय बदली तो मद्धम हुआ हर साज़ का रंग|

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

2 responses to “मद्धम हुआ हर साज़ का रंग!”

    1. धन्यवाद जी

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