कभी सूली पे चढ़ा हूँ!

हर दौर ने बख़्शी मुझे मेराज-ए-मोहब्बत,
नेज़े पे चढ़ा हूँ कभी सूली पे चढ़ा हूँ|

नज़ीर बनारसी

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