क्षण भर को क्यों प्यार किया था!

आज मैं हिंदी गीत के शिखर पुरुष स्वर्गीय हरिवंश राय बच्चन जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ।

बच्चन जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं।

आज प्रस्तुत हैं स्वर्गीय हरिवंश राय जी का यह गीत

क्षण भर को क्यों प्यार किया था?

अर्द्ध रात्रि में सहसा उठकर,
पलक संपुटों में मदिरा भर
तुमने क्यों मेरे चरणों में अपना तन-मन वार दिया था?
क्षण भर को क्यों प्यार किया था?

यह अधिकार कहाँ से लाया?’
और न कुछ मैं कहने पाया –
मेरे अधरों पर निज अधरों का तुमने रख भार दिया था!
क्षण भर को क्यों प्यार किया था?

वह क्षण अमर हुआ जीवन में,
आज राग जो उठता मन में –
यह प्रतिध्वनि उसकी जो उर में तुमने भर उद्गार दिया था!
क्षण भर को क्यों प्यार किया था?

आभार- एक बात मैं और बताना चाहूँगा कि अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में मैं जो कविताएं, ग़ज़लें, शेर आदि शेयर करता हूँ उनको मैं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध ‘कविता कोश’ अथवा ‘Rekhta’ से लेता हूँ|)

आज के लिए इतना ही,

नमस्कार| 

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4 responses to “क्षण भर को क्यों प्यार किया था!”

  1. बहुत सुंदर।

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    1. हार्दिक धन्यवाद जी

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      1. आपका भी हार्दिक धन्यवाद! 🙏😊

        आपका स्नेह, अपनापन और उत्साहवर्धन मेरे लिए अमूल्य है। ईश्वर से प्रार्थना है कि आप सदैव स्वस्थ, प्रसन्न और आनंदमय रहें।

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  2. नमस्कार 🙏🏻

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