ऐसे क्षण आए जीवन में!

आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय रामस्वरूप सिंदूर जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ।

इनकी अधिक रचनाएं मैंने पहले शायद शेयर नहीं की हैं।

आज प्रस्तुत है स्वर्गीय रामस्वरूप सिंदूर जी का यह गीत –

ऐसे क्षण आए जीवन में, माटी कंचन लगे!
नयन रह जायें ठगे-ठगे!

तन लहराये अगरु गन्ध-सा
मन लहरे किसलय-सा,
हर पल लगे प्रणय की बेला
हर उत्सव परिणय-सा,

छाया तक कस लेने वाला बंधन, कंगन लगे!
नयन रह जायें ठगे-ठगे!

अपनी छाया अंकित कर दूँ
इस दहरी उस द्वारे,
पानी में प्रतिविम्ब निहारूँ
मन-मोहक पट-धारे,

चकाचौंध चौंध कर देने-वाला सूरज दर्पण लगे!
नयन रह जायें ठगे-ठगे!

इधर प्रभंजन उठे-उधर
मैं उपवन-उपवन डोलूँ,
फूलों के उर्मिल रंगों में,
धूमिल पलकें धोलूँ,

गगन विचुम्बी वातचक्र नर्तित नन्दन-वन लगे!
नयन रह जायें ठगे-ठगे!

(आभार- एक बात मैं और बताना चाहूँगा कि अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में मैं जो कविताएं, ग़ज़लें, शेर आदि शेयर करता हूँ उनको मैं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध ‘कविता कोश’ अथवा ‘Rekhta’ से लेता हूँ|)

आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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8 responses to “ऐसे क्षण आए जीवन में!”

  1. बहुत सुंदर।

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    1. हार्दिक आभार जी

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  2. अति सुंदर पंक्तियाँ

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    1. हार्दिक धन्यवाद जी

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  3. अति उत्तम 🤍✨

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    1. हार्दिक आभार जी

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  4. नमस्कार 🙏🏻

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    1. नमस्कार जी

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