ये फ़ासला है जो !

रफ़ाक़तों के सफ़र में तो बे-यक़ीनी थी,
ये फ़ासला है जो रिश्ता बनाए रखता है|

वसीम बरेलवी

2 responses to “ये फ़ासला है जो !”

  1. नमस्कार 🙏🏻

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    1. नमस्कार जी

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