जो बात हिज्र की आती तो अपने दामन से,
वो आँसू पोंछता जाता था और मैं रोता था.
नज़ीर अकबराबादी
A sky full of cotton beads like clouds
जो बात हिज्र की आती तो अपने दामन से,
वो आँसू पोंछता जाता था और मैं रोता था.
नज़ीर अकबराबादी
Leave a comment