वो आँसू पोंछता जाता

जो बात हिज्र की आती तो अपने दामन से,
वो आँसू पोंछता जाता था और मैं रोता था.

नज़ीर अकबराबादी

2 responses to “वो आँसू पोंछता जाता”

    1. हार्दिक धन्यवाद जी

      Liked by 1 person

Leave a reply to नितेश मोहन वर्मा Cancel reply