आस को रोकना!

आज मैं विख्यात हिन्दी नवगीतकार स्वर्गीय वीरेंद्र मिश्र जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ|

इनकी कुछ ही कविताएं मैंने पहले शेयर की हैं|

लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय वीरेंद्र मिश्र जी की यह रचना –

आस को रोकना
पीड़ा के नगर-द्वारों पर
      खड़े पहरा देना
अश्रु की राह में
आए अगर सपन कोई
      उसे ठुकरा देना
हाथ से छूट पड़ी जल में किसी गागर ने
      डूबते वक़्त कहा —
गीत जो शेष रहे फूल में शबनम की तरह
      उसे बिखरा देना
तीर्थ सागर का करे ओस अगर मरुथल में
      उसे दफ़ना देना ।

(आभार- एक बात मैं और बताना चाहूँगा कि अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में मैं जो कविताएं, ग़ज़लें, शेर आदि शेयर करता हूँ उनको मैं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध ‘कविता कोश’ अथवा ‘Rekhta’ से लेता हूँ|)

आज के लिए इतना ही,

नमस्कार| 

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3 responses to “आस को रोकना!”

  1. आत्मान की आज्ञा मानो
    जागते रहो
    संकट और पीड़ा और आपके दर्द में
    जब भगवान सपने में आत्मा के माध्यम से बात करते हैं
    यह समझने का प्रयास करें कि ईश्वर आपसे क्या कहना चाहता है
    कोई भी परमेश्वर के हाथ से फिसलता नहीं
    केवल तभी जब वह आपसे कहता है कि आपका भाग्य समाप्त हो गया है
    जो लोग आपको दिव्य ज्ञान देते हैं, उनसे अपना ध्यान भटकने न दें

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  2. नमस्कार 🙏🏻

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    1. नमस्कार जी

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