आज मैं विख्यात हिन्दी नवगीतकार स्वर्गीय वीरेंद्र मिश्र जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ|
इनकी कुछ ही कविताएं मैंने पहले शेयर की हैं|
लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय वीरेंद्र मिश्र जी की यह रचना –

आस को रोकना
पीड़ा के नगर-द्वारों पर
खड़े पहरा देना
अश्रु की राह में
आए अगर सपन कोई
उसे ठुकरा देना
हाथ से छूट पड़ी जल में किसी गागर ने
डूबते वक़्त कहा —
गीत जो शेष रहे फूल में शबनम की तरह
उसे बिखरा देना
तीर्थ सागर का करे ओस अगर मरुथल में
उसे दफ़ना देना ।
(आभार- एक बात मैं और बताना चाहूँगा कि अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में मैं जो कविताएं, ग़ज़लें, शेर आदि शेयर करता हूँ उनको मैं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध ‘कविता कोश’ अथवा ‘Rekhta’ से लेता हूँ|)
आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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