किस ने कहा कि टूट गया ख़ंजर-ए-फ़रंग,
सीने पे ज़ख़्म-ए-नौ भी है दाग़-ए-कुहन* के साथ|
*विरह का दुख
मजरूह सुल्तानपुरी
A sky full of cotton beads like clouds
किस ने कहा कि टूट गया ख़ंजर-ए-फ़रंग,
सीने पे ज़ख़्म-ए-नौ भी है दाग़-ए-कुहन* के साथ|
*विरह का दुख
मजरूह सुल्तानपुरी
Leave a comment