दाग़-ए-कुहन के साथ!

किस ने कहा कि टूट गया ख़ंजर-ए-फ़रंग,

सीने पे ज़ख़्म-ए-नौ भी है दाग़-ए-कुहन* के साथ|

*विरह का दुख

मजरूह सुल्तानपुरी

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