कोई दूसरा कहाँ है!

ये चराग़ बे-नज़र है ये सितारा बे-ज़बाँ है,

अभी तुझ से मिलता-जुलता कोई दूसरा कहाँ है|

                बशीर बद्र

2 responses to “कोई दूसरा कहाँ है!”

  1. वाह वाह।

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    1. हार्दिक धन्यवाद जी

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