रात अँधेरी खिड़की पर

काग़ज़ का इक चाँद लगा कर रात अँधेरी खिड़की पर,

दिल में कितने ख़ुश थे अपनी फ़ुर्क़त की आराइश पर|

                  गुलज़ार

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