घटता-बढ़ता देखते हैं!

तुझको तो हर शाम फ़लक पर घटता-बढ़ता देखते हैं,

उसको देख के ईद करेंगे अपना और इस्लाम है चाँद|   

                 इब्न-ए-इंशा

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