क़लम मैं तो उठा के जाने कब का रख चुका होता,
मगर तुम हो के क़िस्सा मुख़्तसर करने नहीं देते|
वसीम बरेलवी
A sky full of cotton beads like clouds
क़लम मैं तो उठा के जाने कब का रख चुका होता,
मगर तुम हो के क़िस्सा मुख़्तसर करने नहीं देते|
वसीम बरेलवी
🫂
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