उनकी क़ब्रों का भी!

ज़िंदगानी का मज़ा मिलता था जिनकी बज़्म में,

उनकी क़ब्रों का भी अब मुझको पता मिलता नहीं|

अकबर इलाहाबादी

3 responses to “उनकी क़ब्रों का भी!”

  1. Beautiful poetry👏👏👏

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