ग़लती हुई होगी!

आज मैं देश के एक प्रसिद्ध राजनेता और श्रेष्ठ कवि श्री उदय प्रताप सिंह जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ|

श्री उदय प्रताप जी की कुछ  रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं|

लीजिए आज प्रस्तुत है श्री उदय प्रताप सिंह जी का यह नवगीत –

हमारे घर की दीवारों में अनगिनत दरारें हैं
सुनिश्चित है कहीं बुनियाद में ग़लती हुई होगी ।

क़ुराने पाक, गीता, ग्रन्थ साहिब शीश धुनते हैं
हमारे भाव के अनुवाद में गलती हुई होगी ।
जो सब कुछ जल गया फिर राख से सीखें तो क्या सीखें,
हवा और आग के संवाद में ग़लती हुई होगी ।

हमारे पास सब कुछ है मगर दुर्भाग्य से हारे
कहीं अंदर से चिनगारी कहीं बाहर से अंगारे ।
गगन से बिजलियाँ कडकी धरा से ज़लज़ले आए
यही क्या कम हैं हम इतिहास से जीवित चले आए ।
हमारे अधबने इस नीड़ का नक्शा बताता है
कि कुछ प्रारंभ में कुछ बाद में ग़लती हुई होगी ।

 (आभार- एक बात मैं और बताना चाहूँगा कि अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में मैं जो कविताएं, ग़ज़लें, शेर आदि शेयर करता हूँ उनको मैं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध ‘कविता कोश’ अथवा ‘Rekhta’ से लेता हूँ|)

आज के लिए इतना ही,

नमस्कार|                                         

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3 responses to “ग़लती हुई होगी!”

  1. बहुत सुंदर।

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    1. हार्दिक धन्यवाद जी।

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  2. नमस्कार 🙏

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