अहल-ए-ख़िरद* तादीब** की ख़ातिर पाथर ले ले आ पहुँचे,
जब कभी हमने शहर-ए-ग़ज़ल में दिल की बात बयाँ की है|
*बुद्धिजीवी, **सुधार
इब्न-ए-इंशा
A sky full of cotton beads like clouds
अहल-ए-ख़िरद* तादीब** की ख़ातिर पाथर ले ले आ पहुँचे,
जब कभी हमने शहर-ए-ग़ज़ल में दिल की बात बयाँ की है|
*बुद्धिजीवी, **सुधार
इब्न-ए-इंशा
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