A sky full of cotton beads like clouds
काश तू भी मेरी आवाज़ कहीं सुनता हो,
फिर पुकारा है तुझे दिल की सदा ने मेरे|
अहमद फ़राज़
बहुत काम बढ़ा दिया है आजकल आपने “समयसाक्षी” आपके हर पोस्ट का मायने ढूंढते रहते हैं….. गूगल है साक्षी |
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चलिए एक और काम सही, बहुत सी बार प्रसंग से ही बात स्पष्ट हो जाती है।
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