फिर पुकारा है तुझे!

काश तू भी मेरी आवाज़ कहीं सुनता हो,

फिर पुकारा है तुझे दिल की सदा ने मेरे|

अहमद फ़राज़

2 responses to “फिर पुकारा है तुझे!”

  1. बहुत काम बढ़ा दिया है
    आजकल आपने “समयसाक्षी”
    आपके हर पोस्ट का मायने
    ढूंढते रहते हैं…..
    गूगल है साक्षी |

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    1. चलिए एक और काम सही, बहुत सी बार प्रसंग से ही बात स्पष्ट हो जाती है।

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