
हर घड़ी ख़ुद से उलझना है मुक़द्दर मेरा,
मैं ही कश्ती हूँ मुझी में है समुंदर मेरा|
निदा फ़ाज़ली
A sky full of cotton beads like clouds

हर घड़ी ख़ुद से उलझना है मुक़द्दर मेरा,
मैं ही कश्ती हूँ मुझी में है समुंदर मेरा|
निदा फ़ाज़ली
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