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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 21st Sep 2022

    हर सम्त से जवाब आए!

    इस तरह अपनी ख़ामुशी गूँजी, गोया हर सम्त से जवाब आए| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

  • 21st Sep 2022

    जब भी हम ख़ानुमाँ-ख़राब आए!

    जल उठे बज़्म-ए-ग़ैर के दर-ओ-बाम, जब भी हम ख़ानुमाँ-ख़राब आए| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

  • 21st Sep 2022

    दिल में यूँ रोज़ इंक़लाब आए!

    न गई तेरे ग़म की सरदारी, दिल में यूँ रोज़ इंक़लाब आए| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

  • 21st Sep 2022

    आज तुम याद बे-हिसाब आए!

    कर रहा था ग़म-ए-जहाँ का हिसाब, आज तुम याद बे-हिसाब आए| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

  • 21st Sep 2022

    मेहर-ओ-वफ़ा के बाब आए!

    उम्र के हर वरक़ पे दिल की नज़र, तेरी मेहर-ओ-वफ़ा के बाब आए| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

  • 21st Sep 2022

    फिर वो बे-नक़ाब आए!

    हर रग-ए-ख़ूँ में फिर चराग़ाँ हो, सामने फिर वो बे-नक़ाब आए| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

  • 21st Sep 2022

    दस्त-ए-साक़ी में आफ़्ताब आए!

    बाम-ए-मीना से माहताब उतरे, दस्त-ए-साक़ी में आफ़्ताब आए| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

  • 21st Sep 2022

    आए कुछ अब्र कुछ शराब आए!

    आए कुछ अब्र कुछ शराब आए, इसके बा’द आए जो अज़ाब आए| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

  • 21st Sep 2022

    आँखें बोलेंगी!

    आज एक और सुंदर कविता स्वर्गीय भवानीप्रसाद मिश्र जी की शेयर कर रहा हूँ| भवानी दादा की बहुत सी कविताएं मैंने पहले भी शेयर की हैं और उनके बारे में काफी लिखा भी है| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय भवानीप्रसाद मिश्र जी की एक और सुंदर कविता – जीभ की ज़रूरत नहीं है क्योंकि कहकर…

  • 20th Sep 2022

    अब ‘मुल्ला’ को कहना आ गया!

    लब पे नग़्मा और रुख़ पर इक तबस्सुम की नक़ाब, अपने दिल का दर्द अब ‘मुल्ला’ को कहना आ गया| आनंद नारायण मुल्ला

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