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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 29th Sep 2022

    गुनह हमने एक बार किया!

    फिर न माँगेंगे ज़िंदगी या-रब, ये गुनह हमने एक बार किया| गुलज़ार

  • 29th Sep 2022

    अपना ही इंतिज़ार किया!

    हमने अक्सर तुम्हारी राहों में, रुककर अपना ही इंतिज़ार किया| गुलज़ार

  • 29th Sep 2022

    आदतन हमने ए’तिबार किया!

    आदतन तुमने कर दिए वा’दे, आदतन हमने ए’तिबार किया| गुलज़ार

  • 29th Sep 2022

    कितनी ख़ुश-रंग दिखाई दी है!

    आग में क्या क्या जला है शब भर, कितनी ख़ुश-रंग दिखाई दी है| गुलज़ार

  • 29th Sep 2022

    हर चीज़ पराई दी है!

    ज़िंदगी पर भी कोई ज़ोर नहीं, दिल ने हर चीज़ पराई दी है| गुलज़ार

  • 29th Sep 2022

    उसने सदियों की जुदाई दी है!

    जिसकी आँखों में कटी थीं सदियाँ, उसने सदियों की जुदाई दी है| गुलज़ार

  • 29th Sep 2022

    यार ने कैसी रिहाई दी है!

    फिर वहीं लौट के जाना होगा, यार ने कैसी रिहाई दी है| गुलज़ार

  • 29th Sep 2022

    सारी बातों की सफ़ाई दी है!

    सिर्फ़ इक सफ़्हा पलट कर उसने, सारी बातों की सफ़ाई दी है| गुलज़ार

  • 29th Sep 2022

    तेरी आवाज़ सुनाई दी है!

    एक परवाज़ दिखाई दी है, तेरी आवाज़ सुनाई दी है| गुलज़ार

  • 29th Sep 2022

    फसल!!

    एक बार फिर मैं हिन्दी के प्रसिद्ध कवि और साप्ताहिक समाचार पत्रिका ‘दिनमान’ के माध्यम से पत्रकारिता को भी अपनी अमूल्य सेवाएं देने वाले स्वर्गीय सर्वेश्वर दयाल सक्सेना जी की एक सुंदर कविता शेयर कर रहा हूँ| मैंने पहले भी सर्वेश्वर जी की बहुत सी कविताएं शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय सर्वेश्वर…

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