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क्यों हमें मौत के पैगाम दिए जाते हैं!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में शमीम जयपुरी जी की लिखी एक ग़ज़ल प्रस्तुत कर रहा हूँ- क्यों हमें मौत के पैगाम दिए जाते हैं, ये सज़ा कम तो नहीं है कि किए जाते हैं। आशा है आपको पसंद आएगी,धन्यवाद।
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वो मिस्रा-ए-आवारा!
वो मिस्रा-ए-आवारा दीवानों पे भारी है,जिस में तिरे गेसू की बे-रब्त कहानी है| बशीर बद्र
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वो हुस्न जिसे हमने!
वो हुस्न जिसे हम ने रुस्वा किया दुनिया में,नादीदा हक़ीक़त है ना-गुफ़्ता कहानी है| बशीर बद्र
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बारिश में घर लौटा कोई!
आज एक बार फिर मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय कैलाश गौतम जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। इनकी कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय कैलाश गौतम जी का यह नवगीत- बारिश में घर लौटा कोई दर्पण देख रहा न्यूटन जैसे पृथ्वी का आकर्षण देख रहा ।धान-पान-सी आदमकदहरियाली लिपटी है,हाथों…
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क्या जान गँवानी है!
इस हौसला-ए-दिल पर हम ने भी कफ़न पहना,हँस कर कोई पूछेगा क्या जान गँवानी है| बशीर बद्र
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आँसू कभी शीशा है!
ग़म वज्ह-ए-फ़िगार-ए-दिल ग़म वज्ह-ए-क़रार-ए-दिल,आँसू कभी शीशा है आँसू कभी पानी है| बशीर बद्र
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चाँद से मुँह मोड़ा!
जिस संग पे नज़रें कीं ख़ुर्शीद-ए-हक़ीक़त है,जिस चाँद से मुँह मोड़ा पत्थर की कहानी है| बशीर बद्र
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ठहरा हुआ दरिया है!
दिल से जो छटे बादल तो आँख में सावन है,ठहरा हुआ दरिया है बहता हुआ पानी है| बशीर बद्र
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पत्थर की हिफ़ाज़त में!
इक ज़ेहन-ए-परेशाँ में ख़्वाब-ए-ग़ज़लिस्ताँ है,पत्थर की हिफ़ाज़त में शीशे की जवानी है| बशीर बद्र
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बस यही अपराध मैं हर बार करता हूँ!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में मुकेश जी का गाया यह प्रसिद्ध गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ जिसे नीरज जी ने लिखा था- बस यही अपराध मैं हर बार करता हूँ,आदमी हूँ आदमी से प्यार करता हूँ। आशा है आपको पसंद आएगा।धन्यवाद ।