-
ठुकराओ अब के प्यार करो!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं जगजीत सिंह जी की गाई यह ग़ज़ल अपने स्वर में प्रस्तुत कर रहा हूँ- ठुकराओ अब के प्यार करो, मैं नशे में हूँ, जो चाहे मेरे यार करो, मैं नशे में हूँ। आशा है आपको पसंद आएगी, धन्यवाद। *****
-
शाम का गीत!
आज फिर से अपना एक पुराना नवगीत शेयर कर रहा हूँ, यह नवगीत अंतराल-4 में प्रकाशित हुआ था। जला हुआ लाल कोयलाराख हुआ सूर्य दिन ढले। होली सी खेल गया दिनरीते घट लौटने लगे,दिन भर के चाव लिए मनचाहें कुछ बोल रस पगे,महानगर में उंडेल दूध,गांवों को दूधिए चले।राख हुआ सूर्य दिन ढले।। ला न…
-
क्यों हमें मौत के पैगाम दिए जाते हैं!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में शमीम जयपुरी जी की लिखी एक ग़ज़ल प्रस्तुत कर रहा हूँ- क्यों हमें मौत के पैगाम दिए जाते हैं, ये सज़ा कम तो नहीं है कि किए जाते हैं। आशा है आपको पसंद आएगी,धन्यवाद।