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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 26th Nov 2022

    इक दुनिया नई पैदा करें!

    इस पुरानी बेवफ़ा दुनिया का रोना कब तलक, आइए मिल-जुल के इक दुनिया नई पैदा करें| नज़ीर बनारसी

  • 26th Nov 2022

    आप कोई दूसरा धंदा करें!

    कीजिएगा रहज़नी कब तक ब-नाम-ए-रहबरी, अब से बेहतर आप कोई दूसरा धंदा करें| नज़ीर बनारसी

  • 26th Nov 2022

    बंद अपने घर का दरवाज़ा करें!

    सुन रहा हूँ कुछ लुटेरे आ गए हैं शहर में, आप जल्दी बंद अपने घर का दरवाज़ा करें| नज़ीर बनारसी

  • 26th Nov 2022

    दें पर्दे से पर्दे का जवाब!

    जी में आता है कि दें पर्दे से पर्दे का जवाब, हम से वो पर्दा करें दुनिया से हम पर्दा करें| नज़ीर बनारसी

  • 26th Nov 2022

    दो दिन में हम क्या क्या करें!

    ये करें और वो करें ऐसा करें वैसा करें, ज़िंदगी दो दिन की है दो दिन में हम क्या क्या करें| नज़ीर बनारसी

  • 26th Nov 2022

    जहाँ को न समझ जहान-ए-फ़ानी!

    है अगर हसीं बनाना तुझे अपनी ज़िंदगी को, तो ‘नज़ीर’ इस जहाँ को न समझ जहान-ए-फ़ानी| नज़ीर बनारसी

  • 26th Nov 2022

    न समझ सकें तो पानी!

    मिरी बे-ज़बान आँखों से गिरे हैं चंद क़तरे, वो समझ सकें तो आँसू न समझ सकें तो पानी| नज़ीर बनारसी

  • 26th Nov 2022

    कि सँवर गई जवानी!

    तिरा हुस्न सो रहा था मिरी छेड़ ने जगाया, वो निगाह मैंने डाली कि सँवर गई जवानी| नज़ीर बनारसी

  • 26th Nov 2022

    कि बरस चुका है पानी!

    मिरा ग़म रुला चुका है तुझे बिखरी ज़ुल्फ़ वाले, ये घटा बता रही है कि बरस चुका है पानी| नज़ीर बनारसी

  • 26th Nov 2022

    तो ये कैसी बद-गुमानी!

    नहीं मुझसे जब तअल्लुक़ तो ख़फ़ा ख़फ़ा से क्यूँ हैं, नहीं जब मिरी मोहब्बत तो ये कैसी बद-गुमानी| नज़ीर बनारसी

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