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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 1st Dec 2022

    बारिश ही में ये रंग उतर जाते हैं!

    नर्म अल्फ़ाज़ भली बातें मोहज़्ज़ब लहजे, पहली बारिश ही में ये रंग उतर जाते हैं| जावेद अख़्तर

  • 30th Nov 2022

    दीवारों से टकरा के बिखर जाते हैं!

    छत की कड़ियों से उतरते हैं मिरे ख़्वाब मगर, मेरी दीवारों से टकरा के बिखर जाते हैं| जावेद अख़्तर

  • 30th Nov 2022

    कहें क्या कि किधर जाते हैं!

    रास्ता रोके खड़ी है यही उलझन कब से, कोई पूछे तो कहें क्या कि किधर जाते हैं| जावेद अख़्तर

  • 30th Nov 2022

    फूल भी खिलते हैं बिखर जाते हैं!

    दर्द के फूल भी खिलते हैं बिखर जाते हैं, ज़ख़्म कैसे भी हों कुछ रोज़ में भर जाते हैं| जावेद अख़्तर

  • 30th Nov 2022

    न पूरे शहर पर छाए तो कहना!

    धुआँ जो कुछ घरों से उठ रहा है, न पूरे शहर पर छाए तो कहना| जावेद अख़्तर

  • 30th Nov 2022

    दिल ग़म से घबराए तो कहना!

    बदल जाओगे तुम ग़म सुन के मेरे, कभी दिल ग़म से घबराए तो कहना| जावेद अख़्तर

  • 30th Nov 2022

    न कहकर वो मुकर जाए तो कहना!

    बहुत ख़ुश हो कि उसने कुछ कहा है, न कहकर वो मुकर जाए तो कहना| जावेद अख़्तर

  • 30th Nov 2022

    समझ में जब ये आ जाए तो कहना!

    ये गुल काग़ज़ हैं ये ज़ेवर हैं पीतल, समझ में जब ये आ जाए तो कहना| जावेद अख़्तर

  • 30th Nov 2022

    दुनिया तुमको रास आए तो कहना!

    ये दुनिया तुमको रास आए तो कहना, न सर पत्थर से टकराए तो कहना| जावेद अख़्तर

  • 30th Nov 2022

    डैमोक्रैसी!

    आज एक बार फिर मैं हास्य व्यंग्य के श्रेष्ठ कवि और बहुत अच्छे संचालक श्री अशोक चक्रधर जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| चक्रधर जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री अशोक चक्रधर जी की यह कविता, जो आज की लोकतान्त्रिक व्यवस्था का बहुत सुंदर…

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