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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 2nd Dec 2022

    हुस्न सबको ख़ुदा नहीं देता!

    हुस्न सबको ख़ुदा नहीं देता, हर किसी की नज़र नहीं होती| इब्न ए इंशा

  • 2nd Dec 2022

    ये हवस उम्र भर नहीं होती!

    एक दिन देखने को आ जाते, ये हवस उम्र भर नहीं होती| इब्न ए इंशा

  • 2nd Dec 2022

    ज़िंदगी मुख़्तसर नहीं होती!

    बे-क़रारी सही नहीं जाती, ज़िंदगी मुख़्तसर नहीं होती| इब्न ए इंशा

  • 2nd Dec 2022

    इक हमारी सहर नहीं होती!

    रात आ कर गुज़र भी जाती है, इक हमारी सहर नहीं होती| इब्न ए इंशा

  • 2nd Dec 2022

    क्या ख़ता दरगुज़र नहीं होती!

    दोस्तो इश्क़ है ख़ता लेकिन, क्या ख़ता दरगुज़र नहीं होती| इब्न ए इंशा

  • 2nd Dec 2022

    इस तरफ़ है उधर नहीं होती!

    एक जाँ-सोज़ ओ ना-मुराद ख़लिश, इस तरफ़ है उधर नहीं होती| इब्न ए इंशा

  • 2nd Dec 2022

    कोई शय नामा-बर नहीं होती!

    चाँद है कहकशाँ है तारे हैं, कोई शय नामा-बर नहीं होती| इब्न ए इंशा

  • 2nd Dec 2022

    बेकली इस क़दर नहीं होती!

    हमने सब दुख जहाँ के देखे हैं, बेकली इस क़दर नहीं होती| इब्न ए इंशा

  • 2nd Dec 2022

    हमीं को ख़बर नहीं होती!

    शाम-ए-ग़म की सहर नहीं होती, या हमीं को ख़बर नहीं होती| इब्न ए इंशा

  • 2nd Dec 2022

    कुछ ने कहा चेहरा तेरा!

    कल चौदहवीं की रात थी शब भर रहा चर्चा तेरा, कुछ ने कहा ये चाँद है कुछ ने कहा चेहरा तेरा | इब्न ए इंशा

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