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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 3rd Dec 2022

    किसी मंदिर का दिया है यारो!

    कोई करता है दुआएँ तो ये जल जाता है, मेरा जीवन किसी मंदिर का दिया है यारो| कृष्ण बिहारी नूर

  • 3rd Dec 2022

    कोई घर न खुला पाओगे!

    शब है इस वक़्त कोई घर न खुला पाओगे, आओ मय-ख़ाने का दरवाज़ा खुला है यारो| कृष्ण बिहारी नूर

  • 3rd Dec 2022

    माज़ी ने मुझे छोड़ दिया है यारो!

    मुड़ के देखूँ तो किधर और सदा दूँ तो किसे, मेरे माज़ी ने मुझे छोड़ दिया है यारो| कृष्ण बिहारी नूर

  • 3rd Dec 2022

    किताबों में लिखा है यारो!

    जिसका कोई भी नहीं उसका ख़ुदा है यारो, मैं नहीं कहता किताबों में लिखा है यारो| कृष्ण बिहारी नूर

  • 3rd Dec 2022

    क़ैद से मुझ को रिहाई दे!

    या ये बता कि क्या है मिरा मक़्सद-ए-हयात, या ज़िंदगी की क़ैद से मुझ को रिहाई दे| कृष्ण बिहारी नूर

  • 3rd Dec 2022

    सफ़ाई दे तो कहाँ तक सफ़ाई दे!

    मुजरिम है सोच सोच गुनहगार साँस साँस, कोई सफ़ाई दे तो कहाँ तक सफ़ाई दे| कृष्ण बिहारी नूर

  • 3rd Dec 2022

    कामयाब होने पे मुझ को बधाई दे!

    ऐ काश इस मक़ाम पे पहुँचा दे उसका प्यार, वो कामयाब होने पे मुझ को बधाई दे| कृष्ण बिहारी नूर

  • 3rd Dec 2022

    पुकारूँ मैं तो उसी को सुनाई दे!

    काश ऐसा ताल-मेल सुकूत-ओ-सदा में हो, उसको पुकारूँ मैं तो उसी को सुनाई दे| कृष्ण बिहारी नूर

  • 3rd Dec 2022

    निगाह को ऐसी रसाई दे!

    देना है तो निगाह को ऐसी रसाई दे, मैं देखता हूँ आइना तो मुझे तू दिखाई दे| कृष्ण बिहारी नूर

  • 3rd Dec 2022

    रजनीगन्धा खिले पराए आँगन में!

    आज एक बार फिर से मैं हिन्दी के एक श्रेष्ठ गीतकार स्वर्गीय किशन सरोज जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| किशन सरोज जी ने अपने गीतों में प्रेम के सुकोमल भावों को बड़ी महारत के साथ अभिव्यक्त किया है| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय किशन सरोज का यह गीत– मन की सीमा के…

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