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चीन ओ अरब हमारा!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में फिल्म ‘फिर सुबह होगी’ के लिए मुकेश जी द्वारा गाया गया अलग किस्म का गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ- चीन-ओ-अरब हमारा, हिंदोस्तां हमारा, रहने को घर नहीं है, सारा जहाँ हमारा। आशा है आपको पसंद आएगा, धन्यवाद।
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मन का सुगना!
प्रस्तुत है आज का यह गीत, आप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा- मन का सुगना मुक्त, अनाहतक्या फिर कभी लौट पाएगा।गाता रहा बीच लोगों केरहा छिपाता मन के छालेकैसे मीत मिले जीवन मेंपीड़ा के ही दाने डाले ले अति सहजसरल अपनापनक्या उड़ान फिर भर पाएगा। जो कुछ करते आए हैं वेवह तो करते ही जाएंगेजितना सहन…
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सूरत भी ले न जाए!
ख़ुद से भी बढ़ के उस पे भरोसा न कीजिए,वो आइना है देखिए सूरत भी ले न जाए| शीन काफ़ निज़ाम
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बर्बादियाँ समेटने का!
बर्बादियाँ समेटने का उस को शौक़ है,लेकिन वो उन के नाम पे बरकत भी ले न जाए| शीन काफ़ निज़ाम
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ये छत भी ले न जाए!
आँगन उजड़ गया है तो ग़म इस का ता-ब-कै,मोहतात रह कि अब के वो ये छत भी ले न जाए| शीन काफ़ निज़ाम