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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 12th Jul 2023

    अब गिला भी नहीं!

    कभी जो तल्ख़-कलामी थी वो भी ख़त्म हुई, कभी गिला था हमें उनसे अब गिला भी नहीं| जावेद अख़्तर

  • 12th Jul 2023

    कभी मिला भी नहीं!

    कभी तो बात की उसने कभी रहा ख़ामोश, कभी तो हँस के मिला और कभी मिला भी नहीं| जावेद अख़्तर

  • 12th Jul 2023

    कुछ हुआ भी नहीं!

    कभी ये लगता है अब ख़त्म हो गया सब कुछ, कभी ये लगता है अब तक तो कुछ हुआ भी नहीं| जावेद अख़्तर

  • 12th Jul 2023

    मिरा ख़ुदा भी नहीं!

    मैं कब से कितना हूँ तन्हा तुझे पता भी नहीं, तिरा तो कोई ख़ुदा है मिरा ख़ुदा भी नहीं| जावेद अख़्तर

  • 12th Jul 2023

    चांदनी!

    आज एक बार फिर से मैं अज्ञेय जी द्वारा संपादित ‘तारसप्तक’ एक महत्वपूर्ण हिन्दी कवि स्वर्गीय राम विलास शर्मा जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| राम विलास शर्मा जी ने साहित्य और अन्य महत्वपूर्ण विषयों से संबंधित लगभग सौ पुस्तकें लिखी थीं|    लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय राम विलास शर्मा जी की…

  • 11th Jul 2023

    बस इक बूँद गिरा दी!

    हाए ये उनका तर्ज़-ए-मोहब्बत, आँख से बस इक बूँद गिरा दी| कैफ़ भोपाली

  • 11th Jul 2023

    तिरी तस्वीर लगा दी!

    एक कमी थी ताज-महल में, मैंने तिरी तस्वीर लगा दी| कैफ़ भोपाली

  • 11th Jul 2023

    चुपके चुपके दुआ दी!

    झूम के जब रिंदों ने पिला दी, शैख़ ने चुपके चुपके दुआ दी| कैफ़ भोपाली

  • 11th Jul 2023

    वक़्त का मारा लगता है

    ‘कैफ़’ वो कल का ‘कैफ़’ कहाँ है आज मियाँ, ये तो कोई वक़्त का मारा लगता है| कैफ़ भोपाली

  • 11th Jul 2023

    फूल कँवारा लगता है!

    तितली चमन में फूल से लिपटी रहती है, फिर भी चमन में फूल कँवारा लगता है| कैफ़ भोपाली

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