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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 28th Mar 2023

    हँसने हँसाने से रही!

    शहर में सबको कहाँ मिलती है रोने की जगह, अपनी इज़्ज़त भी यहाँ हँसने हँसाने से रही| निदा फ़ाज़ली

  • 28th Mar 2023

    चाँद बना देता है!

    फ़ासला चाँद बना देता है हर पत्थर को, दूर की रौशनी नज़दीक तो आने से रही| निदा फ़ाज़ली

  • 28th Mar 2023

    ठोकर ही उजाला देगी!

    इस अँधेरे में तो ठोकर ही उजाला देगी, रात जंगल में कोई शम्अ जलाने से रही| निदा फ़ाज़ली

  • 28th Mar 2023

    तस्वीर बनाने से रही!

    चंद लम्हों को ही बनती हैं मुसव्विर* आँखें, ज़िंदगी रोज़ तो तस्वीर बनाने से रही| *चित्रकार निदा फ़ाज़ली

  • 28th Mar 2023

    दोस्ती अपनी भी!

    दिन सलीक़े से उगा रात ठिकाने से रही, दोस्ती अपनी भी कुछ रोज़ ज़माने से रही| निदा फ़ाज़ली

  • 28th Mar 2023

    बिस्तर अच्छा लगता है!

    हमने भी सो कर देखा है नए पुराने शहरों में, जैसा भी है अपने घर का बिस्तर अच्छा लगता है| निदा फ़ाज़ली

  • 28th Mar 2023

    पैकर अच्छा लगता है!

    चाहत हो या पूजा सब के अपने अपने साँचे हैं, जो मौत में ढल जाए वो पैकर अच्छा लगता है| निदा फ़ाज़ली

  • 28th Mar 2023

    वो अच्छा लगता है!

    मिलने-जुलने वालों में तो सब ही अपने जैसे हैं, जिससे अब तक मिले नहीं वो अक्सर अच्छा लगता है| निदा फ़ाज़ली

  • 28th Mar 2023

    घर अच्छा लगता है!

    नई नई आँखें हों तो हर मंज़र अच्छा लगता है, कुछ दिन शहर में घूमे लेकिन अब घर अच्छा लगता है| निदा फ़ाज़ली

  • 28th Mar 2023

    चिंगारी बनकर उड़ री!

    आज एक बार फिर से मैं किसी जमाने में हिन्दी काव्य मंचों पर धूम मचाने वाले एक प्रमुख कवि स्वर्गीय गोपाल सिंह ‘नेपाली’ जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| नेपाली जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय गोपाल सिंह ‘नेपाली’ जी की यह कविता –…

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